मंगलवार, 7 मार्च 2023

शोक गीत

 दिन भर के अभिनय के बाद

अलग अलग मुखौटों को उतार

नींद की प्रतीक्षा में 

सुनाई दे रहा है

रात का सन्नाटा, सांस का शोर

नितांत एकांत में बढ़ गई है व्याकुलता 

यादों ने खोल दी है

आँसू की अविरल धारा !


आँसू वही हैं!

दुःख के, सुख के

आँसू नहीं बदलते

भाव बदलता है !


खुशी के आँसू 

रूक जाते हैं अपने आप,

दुःख के आँसू  

रोकने के लिए

देना पड़ता है खुद को दिलासा,

पर ये जो शोक के आँसू है 

इन्हें कैसे रोका जाए

क्या दें दिलासा

जाने वाले लौट के तो नहीं आएँगे !


धीरे धीरे सीख रहा हूँ

शोक के आँसू रोके नहीं जा सकते

हाँ इन्हें सोख सकती है,

बस एक चीज -

जिजीविषा !!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें