शनिवार, 7 सितंबर 2019

एक वज्र सा कोई ख्वाब बुनो

तुम किससे कहोगे
तुम कहोगे क्या
कोई बात किसी की माना है
जो बात तुम्हारी मानेगा ।

एक काम करो
अपने जज्बात को अंदर रख
अपने हाथों से अपने लब
अब सी भी दो ।

क्यों मोम बने हो नाहक ही
कोई लौ भी तुम्हें पिघला देगा
टूटे पत्ते की माफिक हो
कोई झोंका भी टहला देगा ।

एक काम करो
अब पत्थर बन
अपने जज्बात के छैनी से
अंदर तो कोई रूप गढ़ो ।

एक काम करो
एक ख्वाब चुनो
टूटे ख्वाबों की अस्थि से
एक वज्र सा कोई ख्वाब बुनो।

वो ख्वाब तुम्हारा ही हो बस
उस ख्वाब के हर इक कण में तुम
उस ख्वाब को हर पल जीओ तुम
उस ख्वाब में एक दिन मर जाओ ।

रविवार, 11 अगस्त 2019

कलम और बंदूक

कलम ने लिखा दक्षिण
तो वाम नाराज,
कलम ने लिखा वाम
तो आवाम नाराज !

कलम झुंझला के इश्क लिखने लगी !
और माना गया उस दिन से कलम,
बंदूक से कमजोर हो गयी !!

लेकिन फिर गजब हुआ,
इश्क पढ़ने वालों ने
बंदूक उठाने से मना कर दिया,
अब बंदूक कमजोर थी कलम से !!

मामला यहीं खतम नहीं हुआ
दुश्मनों ने कलम पर बैन लगा दिया
फिर बंदूकें गरजीं
चुन चुन के कलमों का कत्ल हुआ
अब बंदूक सरकार थी
, कलम गुलाम !!