गुरुवार, 9 मार्च 2023

एक दिन

एक दिन जब 

टूटे या पूरे

कोई ख्वाब न होंगे


एक दिन जब

अधूरा या पूरा

कोई काम ना होगा


एक दिन जब

छोटी या बड़ी

जरूरत ना महसूस होगी


एक दिन जब

अच्छी या बुरी

खबरों का कोई असर न होगा


एक दिन जब

शरीर या मन में

कोई थकान न होगी


एक दिन जब

अपने पराये की

परवाह न बचेगी


ऐसा एक दिन

जब ढूँढूँगा अपने होने की वजह

और वो एक दिन जो होगा

पूरे जीवन से भी अधिक जीवंत !!

मंगलवार, 7 मार्च 2023

दौर ए गम से बच के निकल जाउंगा

 दौर ए गम से बच के निकल जाउंगा,

मैं किसी बच्चे की तरह बेखौफ मुस्कुराऊंगा।

काँपते हाथ को जो तुम ना संभाले अगर,

याद रखना कि फिर हाथ नहीं आऊंगा।


सूरज सी फितरत थी चमकने की मेरी,

अब तो लगता है कि मैं भी बदल जाऊंगा।

अपने आँसू को जमा रहा हूं मैं,

कभी बादल की तरह बरस जाऊंगा।


और मुझे जानने का भरम पाले बैठे हो

खुद को मेरा खुदा मान बैठे हो

तो बता दूँ कि, मैने यूँ तो कभी नहीं बताया है 

पर तुम जैसे कइयों को मैंने, हाँ मैंने, बनाया है ।।

ये जिंदगी !

 पटकथा के पात्र सी बँधी बँधी,

संतुलन बनाने में डगमगाती सी ये जिंदगी!


सपनों की डोर थामे उड़ती सी,

छूटते हाथों के संग टूटती सी ये जिंदगी!


अपनों के संग की ख्वाहिस लिए,

गैरों में कट रही बेगानी सी ये जिंदगी !


कल का भरोसा लिए भागती हुई ,

आज को निगलती बेईमान सी ये जिंदगी!


नकल भरी दुनिया की नकली सी, 

अंत में मिट्टी ही होगी मिट्टी सी ये जिंदगी !!

प्रवीणनामा ३

 बाबा प्रवीणानंद के 10 वचन 😀👇

1. ईगो बड़ा हो तो छोटे काम मत करो!

2. हाथ कमजोर हो तो दूसरे को उँगली मत करो!

3. मदद करो लेकिन एहसान मत करो!

4. खुशी अपच है तो दुःख भी अपच होगा!

5. पतझड़ तो आएगी ही चाहे बसंत में तुम कुछ भी करो!

6. खुद के आनंद से बढ़कर कुछ नहीं है सिवाय इस        अहसास के कि तुम्हारी वजह से कोई आनंदित है!

7. मस्तिष्क पर दवाब फायदेमंद है लेकिन मन पर दवाब प्राणहर्ता!

8. तुम्हारी काबिलियत तुम्हें तभी इज्जत दिलाएगी जब इससे किसी का फायदा हो या फायदे की उम्मीद हो।

9. गुस्सा आने से भी ज्यादा गलत है कहीं का गुस्सा कहीं और निकालना!

10. तुम दूसरों के प्रति वैसा ही सोचते हो जैसा तुम्हें लगता है दूसरा तुम्हारे बारे में सोच रहा है!

प्रवीणनामा २

 १.आज के इंतजार में कल बीता था, 

कल तक आज भी बीता हुआ कल हो जायेगा । 


२. रात जिस दिन के इंतजार में कटी, उस दिन की रात कोई और कहलायेगी । 


३. वो कँधा जिस पर चढ़ कर उँचाई को छुआ था, वो कँधा ही कल छोटी नजर आयेगी ।


४. वो साँस जिसके आने से प्राण आयी थी, नयी साँसो के लिये उसे ही छोड़ी जायेगी ।


५. परिवर्तन की जो मिसाल है आज, कल के परिवर्तन में वो ही बदली जायेगी ।

शोक गीत

 दिन भर के अभिनय के बाद

अलग अलग मुखौटों को उतार

नींद की प्रतीक्षा में 

सुनाई दे रहा है

रात का सन्नाटा, सांस का शोर

नितांत एकांत में बढ़ गई है व्याकुलता 

यादों ने खोल दी है

आँसू की अविरल धारा !


आँसू वही हैं!

दुःख के, सुख के

आँसू नहीं बदलते

भाव बदलता है !


खुशी के आँसू 

रूक जाते हैं अपने आप,

दुःख के आँसू  

रोकने के लिए

देना पड़ता है खुद को दिलासा,

पर ये जो शोक के आँसू है 

इन्हें कैसे रोका जाए

क्या दें दिलासा

जाने वाले लौट के तो नहीं आएँगे !


धीरे धीरे सीख रहा हूँ

शोक के आँसू रोके नहीं जा सकते

हाँ इन्हें सोख सकती है,

बस एक चीज -

जिजीविषा !!