बुधवार, 20 जून 2012

तुम आ जाओ ,बस आ जाओ


है भींगी पलकें आज मेरी ,
दिल में यादों की झंझावत ,
मैं मर्माहत बैचैन सा ,
एक अकुलाहट को चिर कर ,
बरबस ये आवाज आई ,
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;


है मोम की मोटी चादर सी
जमी हुई मेरे मन में ,
तुम अपने स्नेह की गर्मी  से
पिघला जाओ ,बस आ जाओ
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;



उस सुन्दर निर्मल वेला में,
जब साथ चले थे हम दोनों ..
फिर दिन के निष्ठुर धुप में यूँ ,
तुम चले गये तनहा करके ..
अब अवसान की  वेला  है,
एक छाँव लिए बस आ जाओ ..
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;



इस तिक्रम्बाज़ी दुनिया में ,
मैं थककर चकनाचूर हुआ ..
चलते चलते न मिली मंजिल ,
अब सुस्ताने को अंकुश में ,बस आ जाओ....
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;



मैं तेरे आगे नतमस्तक,
सर झुका के गलती मान रहा ..
मेरे मरु भूमि जीवन में ,
तुम प्यार  की बारिश  करने को ,
बस आ जाओ...
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;

सोमवार, 11 जून 2012

Unmukt Udaan

अक्सर  अंतर्मन  में  ये  , प्रश्न  उठा  पुरजोर
 उड़ना  जब  खुद  ही  पड़ता  है ,
क्यों  थामे  कोई  डोर ... !!!!
तो  बंद करें ये रुदन गान ,
आओ  भरें  हम  ''''Unmukt  Udaan  '''''.