है भींगी पलकें आज मेरी ,
दिल में यादों की झंझावत ,
मैं मर्माहत बैचैन सा ,
एक अकुलाहट को चिर कर ,
बरबस ये आवाज आई ,
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;है मोम की मोटी चादर सी
जमी हुई मेरे मन में ,
तुम अपने स्नेह की गर्मी से
पिघला जाओ ,बस आ जाओ
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;
उस सुन्दर निर्मल वेला में,
जब साथ चले थे हम दोनों ..
फिर दिन के निष्ठुर धुप में यूँ ,
तुम चले गये तनहा करके ..
अब अवसान की वेला है,
एक छाँव लिए बस आ जाओ ..
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;
इस तिक्रम्बाज़ी दुनिया में ,
मैं थककर चकनाचूर हुआ ..
चलते चलते न मिली मंजिल ,
अब सुस्ताने को अंकुश में ,बस आ जाओ....
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;
मैं तेरे आगे नतमस्तक,
सर झुका के गलती मान रहा ..
मेरे मरु भूमि जीवन में ,
तुम प्यार की बारिश करने को ,
बस आ जाओ...
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;