शनिवार, 3 अक्टूबर 2015

फुटपाथ पर सो रहे लोग

चलती कार से झांकती आँखें
आधी रात में निहारती
झिलमिल रौशनी में नहायी
दिल्ली शहर को,
कि तभी दिखता है 
आईएसबीटी बस अड्डे के पास
फुटपाथ पर सो रहे लोग

उन्ही लोगो में कोई दिखा
जो अधमुँहा पड़ा है।
आते जाते गाड़ियों को देख रहा है
उसकी आँखों में, हाव भाव से लग रहा है
वो इन्तेजार कर रहा है
शायद सड़क पर ट्रैफिक काम होने का
नया है शायद ...
आदत नहीं है इस शोरगुल में, गाड़ियों के आवाज में सोने की
जैसे उस बूढ़े को है,
जो आराम से फुटपाथ पर उसके बगल में लेटे
खर्राटे ले रहा है
फ़ोन की घंटी बजते ही कार
फिर से भागने लगी सड़क पर
कुछ देर बाद वही आँखें देख रही
टीवी पर
छोटे सरकार के विकास का विज्ञापन
और बड़े सरकार का बड़े लोगो के साथ सेल्फ़ी।