मंगलवार, 7 मार्च 2023

ये जिंदगी !

 पटकथा के पात्र सी बँधी बँधी,

संतुलन बनाने में डगमगाती सी ये जिंदगी!


सपनों की डोर थामे उड़ती सी,

छूटते हाथों के संग टूटती सी ये जिंदगी!


अपनों के संग की ख्वाहिस लिए,

गैरों में कट रही बेगानी सी ये जिंदगी !


कल का भरोसा लिए भागती हुई ,

आज को निगलती बेईमान सी ये जिंदगी!


नकल भरी दुनिया की नकली सी, 

अंत में मिट्टी ही होगी मिट्टी सी ये जिंदगी !!

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