बुधवार, 29 दिसंबर 2010

bas yunhi

 जब जब बदली घिर जाती है
बारिस की पहली बूंद जब कभी 
मेरे तन छू जाती है 
तब जाने क्यों उस पल 
एक पगली सी लड़की की 
याद मुझे आ जाती है 
कभी ऐसे ही मौसम में 
मिला किये थे हम दोनों 
उन शीतल मादक छण  में जब  
वो चिपक के मुझसे चलती थी 
मन बगिया के सब मुर्झ्हाये 
तब पेड़ हरे हो जाते थे 
मै अक्सर डरता रहता था 
जो भीग गया तो क्या होगा 
वो हाथ पकड़ के मुझको तब  
बारिश में खूब भिंगोती थी 
फिर हसती थी खुस होती थी 
मै देखता रहता था उसको ,
.बस देखता रहता था उसको.......
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aakhiri rudan

aakhiri rudan
स्याह काली रातों  के जैसे 

गम के चादर को आज

कर लिया फैसला मैंने

उतार फेंकने का ;

जैसे हो ये मेरा आखिरी रुदन;;;;; 

samvedana

गगनचुम्बी अट्टालिका के सामने 

चमकते कार के अन्दर से

झांकती हुए दो आँखे

नापते उसके जिस्म को

उसके दुखों से अनजान

जो कराती दुग्धपान

अंकुश में लिए एक अबोध शिशु

बचाती  उसे चिलचिलाती धुप से

तपती वेश्या सड़क पर 

नंगे पावँ;;;;;;;;

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गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

शब्द

कवि  की भावना :-
  • ''शब्द  तो शोर है ,तमाशा है.
    भाव के सिन्धु  में बताशा है 
    मर्म की बात होठों से न कहो 
    मौन ही भावना की भाषा है ''

 परिणाम :-
''मैं मौन की भाषा कहता था
वो शब्द में उलझी रहती थी 
मै शब्द को शोर समझाता था
वो शोर को मर्म समझ बैठी''
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