बुधवार, 3 अगस्त 2011

जिंदगी



पटकथा के पात्र जैसी बंधी सी
ये जिंदगी ,


दर्द के हर आह पर डूबी सी
ये एक बंदगी .


श्वेत  मनहर बर्फ के नीचे की
दलदल गन्दगी ,


सांस के दो चक्र में पिसती
कहानी जिंदगी . !!!!!  

सोमवार, 11 जुलाई 2011

सत्य वचन

नींद  गर  कच्ची है  ,तो  फिर  कच्चे  सपने  आयेंगे !

ऊँचे  ख्वाबों  के  लिए  तो  नींद  गहरी  चाहिए !!!!!!.


धार  कितनी   हो  नदी  में  ,तैर  सकते  हैं  मगर !

पार  करना  हो  समुन्दर  ,तो  सहारा  चाहिए !!!!.


यूँ  तो  हर  पत्थर , पहाड़ों   से  ही  तोड़े  जाते  हैं !

एक  है  क़दमों  के  नीचे ,एक  पे   ये  शीश  है !!!!!


बात  गर  एक  रात  की  है  ,तो  दिया  ही  है  बहुत !.

उजले  जीवन  के  लिए  तो  मन  का  दीपक  चाहिए !!!!!.


मैं  खड़ा  हूँ   मध्य  में ,चहुओर बिखरे  ख्वाब  हैं !

उठ  जाए  कोई   कदम  तो ,टूट  जाता  ख्वाब  है !!!!!!

सोमवार, 9 मई 2011

माँ

सतत प्रणाम करूँ मैं  उसको 
जिसने दी मुझे सांस ,

गर्भ में रखा नौ महीने
तक जीने की दी आस .
.
खून से अपने जिसने सींचा ,
ममता के चादर में भींचा,

दुनिया कहती हैमाँ जिसको ,
मैं मानूँ सब धाम .....

उसे सतत प्रणाम.....



मंगलवार, 3 मई 2011

तुम आ जाओ ,बस आ जाओ

है भींगी पलकें आज मेरी ,
दिल में यादों की झंझावत ,
मैं मर्माहत बैचैन सा ,
एक अकुलाहट को चिर कर ,
बरबस ये आवाज आई ,
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;


है मोम की मोटी चादर सी
जमी हुई मेरे मन में ,
तुम अपने स्नेह की गर्मी  से
पिघला जाओ ,बस आ जाओ
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;



उस सुन्दर निर्मल वेला में,
जब साथ चले थे हम दोनों ..
फिर दिन के निष्ठुर धुप में यूँ ,
तुम चले गये तनहा करके ..
अब अवसान की  वेला  है,
एक छाँव लिए बस आ जाओ ..
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;



इस तिक्रम्बाज़ी दुनिया में ,
मैं थककर चकनाचूर हुआ ..
चलते चलते न मिली मंजिल ,
अब सुस्ताने को अंकुश में ,बस आ जाओ....
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;



मैं तेरे आगे नतमस्तक,
सर झुका के गलती मान रहा ..
मेरे मरु भूमि जीवन में ,
तुम प्यार  की बारिश  करने को ,
बस आ जाओ...
तुम आ जाओ ,बस आ जाओ ;;

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

एक नयी सुबह की चाह लिये

एक  नयी  सुबह  की  चाह   लिये  
वो  रात  अँधेरी  गुजर  गया  
वो  चाँद  को  छूने   की  ख्वाहिश  
उस  चाँद  के  सम्मुख  दफ़न  हुयी .

रक्तिम  सा  रूप  सलोना  सा   

वो  दिवस  की  भट्टी  में तपकर
सर्वस्व विजय  की   चाह  लिए  
वो  राह  अनोखे   निकल  गया

पर  दूर  तलक   जाकर  देखा 
तो  रात  अँधेरी     काली  थी
कुछ  देर  खड़ा  वो  मौन  रहा
 
कुछ  झुंझलाया  कुछ  भ्रमित  सा
फिर  ख्वाब  सुबह  का  लीये  हुए
अपने  ही  धुन  में  मतवाला
वो  राह उसी  बढ़ता  ही  गया

एक  नयी  सुबह  की लिए
 .....................

बुधवार, 2 मार्च 2011

जय हिंद

SAHEED E AAJAM
राहें चुनकर कंटकाकीर्ण


करके शरीर को जीर्ण -शीर्ण


थे आँख से शोणित बह निकले



पर मुह से आह न निकली थी .........
(समर्पित ;शहीद भगत सिंह )
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शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

unmukt udaan

पतंगों की एक महफ़िल में ,

ये  प्रश्न   उठा  चहुओर...

उड़ना जब खुद ही पड़ता है ,

क्यों थामे कोई डोर ????



मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

क्षणभंगुर मन

गर्म  तवे  के  जैसा  ये  मन  ,

खुशियों  की   कुछ  बूंदें  पाकर;

क्षण  से  छनका ,

फिर   गुम  क्यों   है ??????

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

हम हैं बस तेरे दीवाने

मुझे किसी चीज की चाह नहीं ,

दुनिया भर की परवाह नहीं ,

बस एक अगर तू (?)मिल जाए ,

तो क्या उपवन ,क्या वीराने???

हम हैं बस तेरे दीवाने.......

अंतर्द्वंद

मै जाता हूँ ,पाषाणों से सर टकरा कर फिर आता हूँ ...!!!!
जाता हूँ गर्वोन्नत होकर ,
उतशाहित ,उद्वेलित होकर,
करता हूँ  जब भीषण गर्जन ,
पाषाणों की तब क्या बिसात ,
यम भी एक बार थर्राता है ......
मै जाता हूँ ,पाषाणों से सर टकरा कर फिर आता हूँ ....!!!!











पर लौट के जब मैं  आता .हूँ ,
मंथर सी अपनी चाल  लिए ,
अपमानित सा , बैचैन सा  ;
हर लहरों का परिहास लिए ,
चट्टानों का वो अट्टहास ;
अपने  सपनों का हस्र देख ;
मैं हतप्रभ सा रह जाता हूँ  !!!!


......................क्रमशः .