बारिस की पहली बूंद जब कभी
मेरे तन छू जाती है
तब जाने क्यों उस पल
एक पगली सी लड़की की
याद मुझे आ जाती है
कभी ऐसे ही मौसम में
मिला किये थे हम दोनों
उन शीतल मादक छण में जब
वो चिपक के मुझसे चलती थी
मन बगिया के सब मुर्झ्हाये
तब पेड़ हरे हो जाते थे
मै अक्सर डरता रहता था
जो भीग गया तो क्या होगा
वो हाथ पकड़ के मुझको तब
बारिश में खूब भिंगोती थी
फिर हसती थी खुस होती थी
मै देखता रहता था उसको ,
.बस देखता रहता था उसको.......


