शनिवार, 10 फ़रवरी 2024

हारा नहीं हूँ !!

 हारा नहीं हूं!!


उम्र के उठान से

ढलान अब जो दिख रही

ढलान पर लुढकने से पहले

हारा नहीं हूं!!


दौड़ लंबी हो चुकी

अब फासले थोड़े बचे

साथ के धावक सभी

रफ़्तार में आगे खड़े

पार रेखा करने तलक

हारा नहीं हूं!!


ख्वाब के मसान में है

आग ठंढ़ी हो गई

राख के अंदर है अब

चंद चिंगारी बची

जब तलक चिंगारियों में आग है

हारा नहीं हूँ!!


गैर की नजरो में अब

गिरने उठने की बात नहीं

बेमतलब बातों पर अब

लड़ने का जज्बात नहीं

कौन यहां है साथ या छूटे हाथ कोई परवाह नहीं

जब तक माँ का आशीष

और परिवार का विश्वास है

हारा नहीं हूँ !!

हल निकलना चाहिए!

 बढ़ गई बैचेनी अब तो

हल निकलना चाहिए!

जो कड़ी मेहनत है कि

तो फल निकलना चाहिए!

तोड़ते पत्थर रहे

अब जल निकलना चाहिए!

आज कल क्यू कर रहे

इस पल निकलना चाहिए!!


ये जो टुकड़े पैर में हैं 

चुभ रहे अपने ही हैं!

गौर से देखो तो टूटे

कांच से सपने ये हैं!

कांच को अब जोड़ कर

सूरत बदलनी चाहिए!

बढ़ गई बैचेनी अब तो हल निकलना चाहिए!!


कौन थामे डोर

कैसा शोर ये दिल में बढ़ा!

किसने पकड़ा पंख

कैसे कातिलो को हक अदा!

जाहिलो के भीड में हम

फँस गये गरदन तलक!

सांस लेनी है अगर

फौरन निकलना चाहिए!

बढ़ गई बैचैनी अब तो हल निकलना चाहिए!!