उन्मुक्त उड़ान | Unmukt Udaan
सोमवार, 9 मई 2011
माँ
सतत प्रणाम करूँ मैं उसको
जिसने दी मुझे सांस ,
गर्भ में रखा नौ महीने
तक जीने की दी आस .
.
खून से अपने जिसने सींचा ,
ममता के चादर में भींचा,
दुनिया कहती है
माँ
जिसको ,
मैं मानूँ सब धाम .....
उसे सतत प्रणाम.....
2 टिप्पणियां:
Unmukt
3:00 pm, जून 30, 2011
heart touching
poem
poem
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Pravin Jha
1:31 am, जुलाई 12, 2011
thanks.
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heart touching poem poem
जवाब देंहटाएंthanks.
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