मैं चाहता हूँ कि दोनों के दरम्यान
जो चुप्पी की चादर है वो
थोड़ी और मोटी और घनी हो।
इतनी की दोनों के
सहसामंजस्य के दौरान
निकले जहरीले विष को सोख सके।
मैं चाहता हूँ कि दोनों के दरम्यान
जो चुप्पी की चादर है वो
कुछ ऐसी हो जैसे
जाड़े और शरीर के बीच का पश्मीना शॉल।
मैं नहीं चाहता दोनों के बीच
जो चुप्पी की चादर है वो
मोम की परत जैसी हो,
कि एक अपनापन की लौ उसे पिघला जाए।
केवल उनके प्यार की खातिर,
मैं कभी नहीं चाहता कि
दोनों के बीच की चुप्पी टूटे !
क्यूँकि मैं जानता हूँ
दोनों ने भर रखे हैं जहर
अपनी जिह्वा पर ।
इसलिए मैं चाहता हूँ
दोनों के दरम्यान जो चुप्पी की चादर हो
अनंत तक रहे फैला
ताकि उनका प्यार भी महफूज रहे
चुप्पी के चादर के भीतर ।
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