शनिवार, 7 सितंबर 2019

एक वज्र सा कोई ख्वाब बुनो

तुम किससे कहोगे
तुम कहोगे क्या
कोई बात किसी की माना है
जो बात तुम्हारी मानेगा ।

एक काम करो
अपने जज्बात को अंदर रख
अपने हाथों से अपने लब
अब सी भी दो ।

क्यों मोम बने हो नाहक ही
कोई लौ भी तुम्हें पिघला देगा
टूटे पत्ते की माफिक हो
कोई झोंका भी टहला देगा ।

एक काम करो
अब पत्थर बन
अपने जज्बात के छैनी से
अंदर तो कोई रूप गढ़ो ।

एक काम करो
एक ख्वाब चुनो
टूटे ख्वाबों की अस्थि से
एक वज्र सा कोई ख्वाब बुनो।

वो ख्वाब तुम्हारा ही हो बस
उस ख्वाब के हर इक कण में तुम
उस ख्वाब को हर पल जीओ तुम
उस ख्वाब में एक दिन मर जाओ ।

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