कवि की भावना :-
''शब्द तो शोर है ,तमाशा है.भाव के सिन्धु में बताशा हैमर्म की बात होठों से न कहोमौन ही भावना की भाषा है ''
परिणाम :-
''मैं मौन की भाषा कहता था
वो शब्द में उलझी रहती थी
मै शब्द को शोर समझाता था
वो शोर को मर्म समझ बैठी''
