गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

शब्द

कवि  की भावना :-
  • ''शब्द  तो शोर है ,तमाशा है.
    भाव के सिन्धु  में बताशा है 
    मर्म की बात होठों से न कहो 
    मौन ही भावना की भाषा है ''

 परिणाम :-
''मैं मौन की भाषा कहता था
वो शब्द में उलझी रहती थी 
मै शब्द को शोर समझाता था
वो शोर को मर्म समझ बैठी''
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