बढ़ गई बैचेनी अब तो
हल निकलना चाहिए!
जो कड़ी मेहनत है कि
तो फल निकलना चाहिए!
तोड़ते पत्थर रहे
अब जल निकलना चाहिए!
आज कल क्यू कर रहे
इस पल निकलना चाहिए!!
ये जो टुकड़े पैर में हैं
चुभ रहे अपने ही हैं!
गौर से देखो तो टूटे
कांच से सपने ये हैं!
कांच को अब जोड़ कर
सूरत बदलनी चाहिए!
बढ़ गई बैचेनी अब तो हल निकलना चाहिए!!
कौन थामे डोर
कैसा शोर ये दिल में बढ़ा!
किसने पकड़ा पंख
कैसे कातिलो को हक अदा!
जाहिलो के भीड में हम
फँस गये गरदन तलक!
सांस लेनी है अगर
फौरन निकलना चाहिए!
बढ़ गई बैचैनी अब तो हल निकलना चाहिए!!
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