उन्मुक्त उड़ान | Unmukt Udaan
बुधवार, 3 जुलाई 2013
खोल दो इन बंधनों को
खोल दो इन बंधनों को,
उड़ने दो उन्मुक्त;
बाँधा जो तुमने था कभी
एक अबोध शिशु के मानस पर
रिश्तों का ककहरा सिखा कर,
पत्थर के आगे घुटने टिकवाकर;
थोप दी कूड़ा की वो पट्टियां
हटा दो इन पट्टियों को
हो जाने दो फिर से निर्दोष ....!!!
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