मैं अक्सर तनहा बैठ के यूँ ,

पागल सा सोचा करता हूँ ;
इन साँसों का , इन बातों का
इन कोमल से जज्बातों का ,
उद्देश्य है क्या???
ये बालपन , ये युवाजोश ;
बौद्धिकता के ये शब्दकोष ,
ये मनुष्यता की मीठी वाणी ,
ये बुआ ,चाचा औ नानी ,
इन रिश्तों का ,इन नातों का ,
अमावास-पूनम की रातों का ,
उद्देश्य है क्या ???
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